Saturday, September 5, 2009

Sannata

कल,
पूरे बाईस महीने बाद,
चीखने, चिल्लाने, रोने, गलियाने के
पूरे बाईस महीने बाद
मैंने तुम्हे सुना.

तब,
जब दोनों चुप थे
और तुम अनिश्चित उंगलिओं से
मेज़ पर पडे एक कटोरी में
पानी पर तैरती
उस नाजुक मोमबत्ती को
बुझाने की कोशिश कर रही थी -

तब,
तुम्हारे सूजे हुए चेहरे ने
और बरसाती आँखों ने
मुझे इन पूरे बाईस महीने के
बेतुके, अश्लील, फालतू सवालों के
सारे जवाब

चुपचाप दे दिए.

और मैं?
बुझती मोमबत्ती को
बचने की ख्वाम्खा कोशिश
करता गया

...आदतन !

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