Saturday, December 5, 2009

tum


तुम जो मेरे साथ होते 
तो कल, मेरी बंद आखों सी काली इस रात में,
सप्तर्षि मंडल को हम साथ साथ फिर से पहचान रहे होते |

तुम जो मेरे साथ होगे
तो कल,  छंदित शब्दों की सूरध्वनि,
कविताओं की पंक्तियों से अनायास नजदीकियों में बदल जाएगी |

तुम, जो मेरे साथ हो,
तो आज, तुम्हारी सच में सनी बचकानी बातें
ऑर मेरे लिए मचली सैकड़ों अभिलाषाएं
अरबों मूक शिकायतें 
हर रोज़ मुझे उकता देने वाली
दर्ज़नों छोटी-मोटी, देहाती आदतें,
आज,

तुम, जो शायद मेरे पीछे परेशां होने वाली
एकलौते इंसान हो,
आज 
उस तुमसे 
मन ही मन निजात पाने की 
हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी, बेशर्म ............

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