Friday, November 28, 2008

Rishta, dara hua

डर,
बारूद का धुआं लिए मेरी सासों से
रिस-रिस कर मेरे खून में उतरता है;

एक रिश्ता,
खुले घाव सा खतरनाक लहू-लुहान,
उस डर को हर रोज़ बाहर निकल लाता है

- A nation under siege and a relationship, too

2 comments:

Anupama Kondayya said...

Thank you :) .

Sowmya said...

A short verse but a good one... enough to make an impact. :)