Thursday, October 22, 2009

अकेला - 1

अच्छा, ये जो मेरे साथ
कभी, कोई नहीं होता-
सुबह जल्दी उठने का अलार्म से लेकर
११.३० का मीटिंग
१२.४५ को इंश्योरेंस का चैक जमा करना
३:०० बजे तक प्राप्ति घर पहुची या नहीं
५:०० तक यह समझना
की मेरे विचार खरीददार-ओं से बिलकुल अलग
माधुरी आई तो अच्छा
नहीं तो ६:३० तक
सबकी जली_भुनी नज़रों के सामने से
घर भागना
और
कम से कम तीन घंटे
सबकी मन मुताबक खित्मेत करने के बाद
रात की बेमतलब चैनल्स के सामने सोफे पे
या अपनी लैपटॉप लिए
शुन्यता के साथ सूनी बकवास
फिर करीब १२ बजे तक
एक लम्बी सी तकिये की दूरी पर,
सबकुछ मेरी ज़िम्मेदारी?

क्या यही होता है?
अपनी छोटी मोटी चाहतों से
खतरनाक रिश्तेदारियों तक
घूमने, टहलने की चहल पहल -
बिलकुल अकेले?

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